बिलासपुर— देश दुनिया का तेजी से विकास हो रहा है..भारत भी इससे अछूता नहीं है। हमारे बच्चे अपनी प्रतिभा से देश विदेश में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। तेजी से हो ग्लोबिल बदलाव के मद्देनजर एक बार फिर दुनिया की नजर भारतीय मेधा पर टिक गयी है। और जरूरी भी है..संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा को शेरनी को दूध कहा है। उन्होने बताया है कि जिसने भी इसका स्वाद चखा..वह हर जगह दहाड़ेगा। बात में सच्चाई है…उन्होने यह भी कहा था कि समय के साथ शिक्षा को भी ढलना होगा। जाहिर सी बात है कि शिक्षा जगत भी ग्लोबल परिवर्तन से अछूता नहीं है। यही कारण है कि  वैज्ञानिक युग में शिक्षा को तर्क संगत बनाने को लेकर भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एलान किया। विद्वानों ने स्पष्ट किया है कि नई शिक्षा नीति से भारत की मेधा का ना केवल समग्र विकास होगा। बल्कि  2020-2030 का दशक शिक्षा क्रांति के रूप में जाना जाएगा।

प्रोजेक्ट अपलिफ्ट मतलब मेधाशक्ति को बढ़ावा

 जानकारी देते चलें कि भारतीय शिक्षा जगत के आधार को मजबूत बनाने भारत सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एलान किया। भारत सरकार ने वर्तमान शिक्षा पद्धति को ज्यादा तार्किक,वैश्विक और प्रासंगिक बनाने के लिए जरूरी पाठ्यक्रम का निर्धारण किया है। नई राष्ट्रीय नीति के शैक्षणिक स्वरूप का शिक्षा जगत में भारतीय मेधा शक्ति को वैश्विक स्वरूप देने का हिमायती संस्थान उलिप्सु ने भी स्वागत किया है। इतना ही नहीं नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रोजेक्ट का देश के आला अधिकारियों समेत वैश्विक मेधा शक्ति ने स्वागत किया है। भरोसा जाहिर किया है कि उलिप्सु का प्रोजेक्ट अपलिफ्ट देश की नई शिक्षा नीति को मील के पत्थर के रूप में स्थापित करेगा। क्योंकि उलिप्सु का का पोजेक्ट अपलिफ्ट शैक्षणिक विषयों के साथ साथ छात्रों को व्यवहारिक कौशल से जोड़ने में महत्व देता है।

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छात्रों को वैज्ञानिक सोच से साक्षात्कार

   वर्तमान समय में संचालित शैक्षणिक संस्थान छात्रों को प्रभावी व्यवहारिक प्रशिक्षण तकनिकी रूप से देने में सक्षम नहीं है। इसकी मूल वजह जरूरी तकनिकी सुविधाओं का नहीं होना है। इसके लिए प्रत्येक क्षेत्र में प्रयास की जरूरत है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की बैठक में कहा गया है कि संस्थानों को आवश्यक उपकरणों और  मशीनरी के साथ समग्र कौशल प्रयोगशाला की स्थापना जरूरी है। ऐसा करने के बाद ही उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षण  दिया जाना संभव होगा। व्यवसायिक स्तर पर छात्रों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। पारम्परिक विकल्पों के नए दरवाजे खुलेंगे। नई खोज के लिए बुनियाद तैयार होगा। उद्यमिता और नवाचार को पंख लग जाएगा। 

छात्रों को मिलेगा सफलता का वैश्विक मंच

      उलिप्सु ने प्रोजेक्ट अपलिफ्ट के तहत समग्र शिक्षा अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने का बीड़ा उठाया है। प्रदेश के सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना है। साथ ही शैक्षणिक क्षमताओं को बढ़ाना है। जैसे की शिक्षा नीति में स्पष्ट है कि डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास पर जोर देना है। ऐसा कर उलिप्सु ने जिम्मेदारी के साथ युवा ताकतों को सफलता का वैश्विक मंच देने का बीड़ा उठाया है। इसके लिए बच्चों के साथ शिक्षकों को महत्वपूर्ण कौशल में पारंगत करना है। प्रोजेक्ट अपलिफ्ट के माध्यम से प्रत्येक स्कूल में बच्चों को साल भर कौशल सीखने का अवसर प्रदान करना, डिजिटल शिक्षा के ठांचे में आमूलचूल परिवर्तन कर बच्चों में स्किल विकसित करना उलिप्सु का सबसे बड़ा लक्ष्य है।

खुलेंगे ज्ञानार्जन के दरवाजे

प्रोजेक्ट के तहत योग,भाषा,संवाद, गणित,जीवन कौशल,अंतरिक्षि के साथ वित्त और रोजगार का ज्ञान देना उलिप्सु ने केन्द्र में रखा है। सबसे बड़ी बात कि बच्चों को यह जानकारी उलिप्सु ने मानक भाषा के साथ स्थानीय भाषा में देने का संकल्प लिया है। जिससे गूढ़ से गूढ बातों को सीखने में बच्चों को आसानी होगी। इसके पहले ना केवल आधार भूत संरपचना को मजबूत किया जाएगा। बल्कि शिक्षकों को भी उलिप्सु के विशेषज्ञ प्रशिक्षित करेंगे। साथ ही बच्चों को भी नवाचार से जोड़ेंगे।

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बच्चों का समग्र विकास पर फोकस

 अभियान के तहत कौशल माड्यूल चलाने के लिए आवश्यक हार्डवेयर प्रदान किया जाएगा। प्रमुख रूप से सर्वर, स्पीकर और प्रोजेक्टर की व्यवस्था होगी। प्रशिक्षित शिक्षक डिजिटल माध्यम से बच्चों को नए युग के साथ शिक्षा के स्तर को अपग्रेड करेंगे। साल के अन्त में सभी बच्चों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार भी दिया जाएगा। सत्र के बीच में बच्चों की प्रगति रिपोर्ट का परीक्षण भी किया जाएगा।

 उलिप्सु ने प्रोजेक्ट अपलिफ्ट योजना के तहत ना केवल छात्रों के लिए बल्कि स्कूल और देश को लेकर अपना टारगेट निश्चित किया है। उलिप्सु टीम को सफलता भी मिल रही है। स्कूल के बच्चे ही नहीं बल्कि शिक्षक और माता पिता टारेगट के सबसे बड़े साधक साबित हो रहे हैं। बच्चे समय के साथ जुड़कर समय से आगे पहुंच रहे हैं।

प्रोजेक्ट अपलिफ्ट का परिणाम

उलिप्सु के प्रोजेक्ट अपलिफ्ट से जुड़कर प्रत्येक छात्र कम से कम दो बुनियादी कौशल के अलावा नए युग के कौशल से परिचित होगा। छात्र इंटरैक्टिव विधा से परिचित होंगे। शिक्षकों का उन्नयन होगा। विषय और वैश्विक दुनिया को अधिक से अधिक जानने का मौका मिलेगा। छात्रों की अभिरूचियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही छात्रों को प्रयोग के माध्यम से सिद्धान्तों को जानने का अवसर मिलेगा।  वित्तीय साक्षारता के साथ उद्योग मानसिकता को बढ़ावा मिलेगा। नए अवसर का सृजन होगा। स्कूल तकनिकी रूप से मजबूत होगा। छात्रों को ज्यादा से ज्यादा सफलता की ऊंचाइयों को हासिल करने मौका मिलेगा। सबसे बड़ी बात की स्कूल में तकनिकि परिस्थितियां स्थापित होंगी। यह अपने आप में किसी युग को प्रभावित करने के लिए काफी है। 

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Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।वर्तमान में CGWALL में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।

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